इंजन बंद… सांसें बचीं…

प्रजातंत्र ब्यूरो

कैप्टन साठे ने हवा में 3 राउंड लगाकर ईंधन कम किया और क्रैश होने से पहले इंजन बंद कर विमान को आग से बचाया, 180 जिंदगियां बचाईं पर खुद की जान गंवाई

नागपुर। भारतीय वायु सेना के पूर्व विंग कमांडर और एयर इंडिया के पायलट दीपक साठे ने शुक्रवार को कोझीकोड में हुए विमान हादसे में एक बहादुर सैनिक की तरह अपनी जान गंवा दी पर अपने अनुभव और सूझबूझ से 180 यात्रियों को बचा लिया। उन्होंने एअरपोर्ट के तीन राउंड लगाकर फ्यूल की मात्रा को कम कर दिया और क्रेस होने से पहले विमान का इंजन बंद कर दिया। इससे आग लगने की संभावनाएं कम कर दी थीं। अगर प्लेन में आग लग जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस बात की जानकारी दीपक साठे के चचेरे भाई और एनएचएआई के वित्तिय सलाहकार नीलेश साठे ने अपनी भावात्मक फेसबुक पोस्ट में साझा की है।
मुझे सहसा विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मेरे चचेरे भाई से कहीं अधिक मेरा दोस्त दीपक साठे अब इस दुनिया में नहीं रहा। वह वंदे भारत मिशन के तहत दुबई में फंसे यात्रियों को लाने वाली उस एअर इंडिया एक्सप्रेस का पाइलट था जो कि शुक्रवार शाम को कोझिकोड एअरपोर्ट पर फिसकर गहरी खाई में जाकर क्रैश हो गई थी ,इस घटना के तथ्य जिनसे से कुछ सीखा जा सकता है।
प्लेन का लैंडिंग गियर्स काम नहीं कर रहा था।

वायुसेना के पूर्व फायटर पाइलट दीपक ने एयरपोर्ट के तीन चक्कर लगाए, ताकि फ्यूल खत्म हो जाए। इससे आपातकालीन स्थितियों में विमान को आग से बचाया जा सके। इसलिए क्रैश होने के बाद विमान में न आग लगी और न ही धुंआ उठा।
प्लेन क्रैश होने से ठीक पहले उसने इंजन बंद कर दिया। इसलिए एयरक्राफ्ट में आग नहीं लगी।

उन्होंने तीसरे प्रयास में लेंडिग की इसलिए दाहिना विंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने खुद की जिंदगी को दांव पर लगाकर 180 यात्रियों की जान बचा ली। दीपक को महारथ के साथ आसमान में उड़ने का 36 साल का अनुभव था। वे एनडीए के 58 वें बैच पासआउट और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर अवॉर्डी थे। 2005 में एयर इंडिया ज्वाइन करने से पहले 21 साल तक वायु सेना में फाइटर पायलट थे।

नीलेश ने बताया कि 1990 के दशक में दीपक एक प्लेन क्रैश में बच गए थे। उनकी खोपड़ी में चोटें आई और 6 महीने अस्पताल में भर्ती रहे थे। तब किसी ने सोचा नहीं था कि अब वे दोबारा प्लेन उड़ा पाएंगे। आत्मविश्वास और प्लेन उड़ाने के जज्बे की वजह से यह उन्होंने चमत्कारिक ढंग से वायु सेना की फाइटर विंग में वापसी की।

वे अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए। दोनों बेटे आईआईटी मुम्बई के पासआउट हैं। उनके पिता रिटायर्ड कर्नल वसंत साठे पुणे में पत्नी के साथ रहते हैं। उनके भाई कैप्टन विकास कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे।
एक सिपाही अपने देश के लोगों के लिए जीता है और उन्हीं के लिए अपनी अंतिम सांस लेता हैं।

इस समय मुझे एक सैनिक की लिखी हुई कविता याद आ रही है।

अगर मैं युद्धभूमि में मारा जाऊं,
मुझे बक्से में बंद कर घर पहुंचा देना
मेरे मेडल मेरी छाती पर रख देना
मेरी मां से कहना कि मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी
मेरे पिता से कहना कि सिर नहीं झुकाएं
अब उन्हें मेरी वजह से टेंशन नहीं होगा
मेरे भाई से कहना कि मन लगाकर पढ़ाई करे
मेरी बाइक की चाबी अब हमेशा के लिए उसकी हो जाएगी
मेरी बहन से कहना कि अपसेट न हो…
आज का सूरज ढलने के बाद उसका भाई कभी नहीं जागेगा
और मेरे प्यार से कहना कि रोए नहीं
क्योंकि, मैं एक सैनिक हूं जिसका जन्म ही वीरगति के लिए हुआ है

इंदौर एयरपोर्ट : रेस्क्यू वाहनों के रास्ते पर कीचड

इंदौर। शुक्रवार को केरल के कोझिकोड में हुए विमान हादसे के बाद शनिवार को सांसद शंकर लालवानी और अफसरों ने रन वे के एक छोर से दूसरे छोर तक का जायजा लिया। इस दौरान पाया गया कि सिंहासा गांव वाली बाउंड्री वाल पर बने गेट का रास्ता कीचड़भरा है। कीचड़ इनता कि पैदल चलना मुश्किल। एयरपोर्ट डायरेक्टर अर्यमा सान्याल ने बताया कि अगर विमानतल परिसर के अंदर या बाहर कोई हादसा होने पर रेस्क्यू वाहन जैसे पुलिस, फायरब्रिगेड और एम्बुलेंस के िलए यही रास्ता है। इस पर सांसद ने तुरंत मौका मुआयना करवाया और जिला प्रशासन से यहां पर सड़क बनाने की कार्ययोजना बनाने को कहा।

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