कोरोना के बारे में गलत जानकारी से गई 800 लोगों की जान

वाशिंगटन

कोरोना वायरस को लेकर एक चौंकाने वाला शोध हुआ है। इसके मुताबिक इससे जुड़ी भ्रामक जानकारी और अफवाहों के कारण भी दुनिया भर में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है वहीं हजारों लोग पीड़ित हुए हैं। शोध के मुताबिक “इंफोडेमिक” ने कोविड-19 से जुड़ी पीड़ा को सोशल मीडिया और अफवाहों के जरिए और अधिक बढ़ाया है। अफवाह के अलावा इससे जुड़े षड्यंत्र के बारे में भी जोर-शोर से सोशल मीडिया पर लोग मैसेज पोस्ट कर रहे हैं। यह जानकारी अमेरिकन जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन के शोध में सामने आई है। कोरोना वायरस के बारे में गलत जानकारी के कारण कम से कम 800 लोग मारे गए हैं। विश्व भर में कोरोना से जुड़ी अफवाह के कारण लोगों को आंख की रोशनी से लेकर जान तक गंवानी पड़ी है। बीमारी से जुड़ा कलंक और साजिश के सिद्धांतों ने दुनिया भर में हजारों लोगों की पीड़ा को बढ़ा दिया है।

ऑस्ट्रेलिया, जापान और थाईलैंड जैसे अलग-अलग देशों के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने अध्ययन के हिस्से के रूप में दिसंबर 2019 और अप्रैल 2020 के बीच संकलित आंकड़ों का अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, “हमने कोविड-19 से जुड़ी अफवाहों पर ध्यान दिया। कलंक और साजिश की थ्योरी जो ऑनलाइन फैलाई जा रही थी, इनमें फैक्ट चेकिंग वेबसाइट, फेसबुक, ट्विटर और ऑनलाइन न्यूज पेपर शामिल थे। इसके साथ ही हमने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कोरोना के प्रभावों का भी अध्ययन किया।”

87 देशों में उपलब्ध डाटा का विश्लेषण

इस रिपोर्ट में 87 देशों की 25 भाषाओं में उपलब्ध डाटा का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि कुछ एशियाई देशों में, महामारी को रोकने के लिए काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों और संक्रमित नागरिकों को बदनाम करने की बार-बार कोशिश की गई है। नतीजतन उन्हें कई बार गालियां सुननी पड़ी और शारीरिक हमले सहने पड़े।

अफवाह और साजिश के सिद्धांत…

*भारत में सैकड़ों लोगों ने संक्रमण को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी के कारण गाय का पेशाब पीया या गाय का गोबर खाया।
*सऊदी अरब में ऊंट के पेशाब को चूने के पानी के साथ इस्तेमाल को कोरोना के खिलाफ कारगर बताया गया।
*वैज्ञानिकों ने अन्य और अफवाहों पर शोध किया, इनमें लहसुन खाना, गर्म मोजे पहनना और छाती पर बत्तख की चर्बी को रगड़ने से बीमारी का इलाज होना शामिल है।

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