महाराष्ट्र में आजादी की लड़ाई में गवाह रहे जेलों में 26 जनवरी से शुरू होगा जेल पर्यटन

मुंबई । गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र में आजादी की लड़ाई में गवाह रहे जेलों में आम नागरिकों को जाने की अनुमति देते हुए जेल पर्यटन शुरू किया जाए। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे 26 जनवरी को पुणे स्थित यरवड़ा जेल से करने वाले हैं।

गृहमंत्री ने नागपुर में पत्रकारों को बताया कि आजादी की लड़ाई में महाराष्ट्र की जेलों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आजादी की लड़ाई में शामिल नेताओं को ब्रिटिश सरकार ने महाराष्ट्र के ठाणे, नासिक, येरवड़ा, रत्नागिरी ,धुले आदि विभिन्न जेलों में कैदी बनाकर रखा था। ब्रिटिश सरकार ने 1838 में यरवड़ा जेल में महात्मा गांधी, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, मोतीलाल नेहरू,पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सरोजनी नायडू, सुभाषचंद्र बोस देश को यहां कई महीनों तक रखा था और यातनाएं दी थीं।

इसी तरह इसी जेल में मुंबई पर 26 जनवरी 2008 को आतंकवादी हमला करने वाले अजमल कसाब को फासी दी गई थी। देश की युवा पीढ़ी इन जेलों में जाना चाहती है ,देखना चाहती है। इसी वजह से राज्य सरकार ने जेल पर्यटन शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए इच्छुक लोगों को जेल प्रशासन से बाकायदा अनुमति लेना आवश्यक रहेगा। जिन लोगों को जेल पर्यटन के लिए अनुमति दी जाएगी,उन्हें जेल के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करना प्रतिबंधित रहेगा। जेल पर्यटन के दौरान पूरी तरह सुरक्षा के इंतजाम किया जाएगा।

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