आकांक्षा की झील

– हरीश भादानी

11 जून 1933 राजस्थान के बीकानेर में जन्म। अधूरे गीत, सपन की गली, हंसिनी याद की, सन्नाटे के शिलाखंड पर, आड़ी तानें-सीधी तानें आदि प्रमुख कृतियां। 2 अक्तूबर 2009 को निधन।

काव्यांश

आकांक्षा की झील
सामने
आकांक्षा की झील की
हिलकती पर्त
भूरी दूरियों के थूथनों पर ढरकी टिकी हैं
और मेरी
सव्य साची-लक्ष-गन्धें
परसने को
सघी ही सघी जा रही हैं
और मेरी
आस्था की रास
पंथ-शोधी-दृष्टियों के सारथी के हाथ
बस, अभी क्षण बाद
मेरी यात्राओं का साक्षी
यह संजयी-सूरज
दिशाओं में कुम-कुम उड़ा कर सूचना देगा-
आकांक्षा में
गन्धों के विलय की!

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