राजनीतिक और समाजिक विसंगति को आइना दिखा गया ‘आप कौन चीज के डायरेक्टर हैं जी’

बेगूसराय! बिहार की सांस्कृतिक धरती बेगूसराय में आयोजित आठवें आशीर्वाद राष्ट्रीयनाट्य महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार की रात मासूम आर्ट ग्रुप पलामू (झारखंड) के कलाकारों ने ‘आप कौन चीज केडायरेक्टर हैं जी’ में मंच के माध्यम से ऐसा सशक्त प्रहार किया कि शुरू से अंत तक लोग ताली बजाते रहे। इसमें वर्तमान सामाजिक परिवेश को पृष्ठभूमि में रखते हुए राजनीतिक, धार्मिक एवं परिवारिक विसंगतियों पर करारा प्रहार किया गया। जटिल एवं उलझे हुए विषय पर कैसे हास्य प्रधान नाटक हो, इसका जीवंत उदाहरण इसमें दिखा।

नाटक में महाभारत काल के भीम को आज का आम आदमी का प्रतिनिधि बनाया गया है जो दुर्बल है।
दुर्योधन अराजकता, लूट-मार, भ्रष्टाचार का प्रतिक है जो बलवान है। महाभारत में तो भीम उसे पटकने में सफल होता है, लेकिन आज के भारत में दुर्योधन ही भीम पर हावी है। नाटक ने राजनीतिक विसंगति समाजिक विसंगति और धार्मिक विसंगति के साथ घरेलू विसंगतियों को हास्य व्यंग के द्वारा मंच से उजागर किया, जिसकी दर्शकों ने भरपूर सराहना की।

नाटक ने बताया कि गलतियों का सामूहिक प्रतिकार होना चाहिए, ताकि गलती करने वाले को इसका अहसास हो सके। लेकिन इस देश
में सामूहिक प्रतिवाद की परंपरा समाप्त हो रही है, प्रतिवाद फैशन बनता जा रहा है। नाटक ने चर्चित हास्य फिल्म ‘जाने भी दो यारों’ की यादें ताजा कर दी। नाटक की कहानी एक नौटंकी के डायरेक्टर के ईद-गिर्द घूमती है। मुखियाजी विधायक का चुनाव लड़ना चाहते थे। उनकी मुलाकात एक नौटंकी पार्टी के डायरेक्टर से होती है।

जनता को लुभाने के लिए डायरेक्टर की सलाह पर नेताजी क्षेत्र में दुर्योधन वध नौटंकी कराने के लिए तैयार होते हैं। इसमें दुर्योधन का किरदार नेताजी के बलवान बेटे को मिल जाता है, जबकि उसके घर के हलवाह को भीम को रोल करता है। नेताजी का बेटा अपने घर के नौकर के हाथों मरने से इंकार कर देता है। इस दौरान डायरेक्टर की ऊहा-पोह दर्शकों को खूब हंसाती है। महाभारत के सीन को प्रदर्शित करने वाला निर्देशक अपने अभिनेताओं के डिमांड और फरमाईस से इतना परेशान है कि उसके पात्र महाभारत की कहानी ही बदल देते हैं। इस बात पर भीड़ गुस्साकर नाटक के डायरेक्टर को भला बुरा कहती है, भीड़ से जूता चल जाता है।

निर्देशक दर्शकों के गुस्से को देख कहता है कि ‘काश यह गुस्सा देश बंटने से पहले होता, निर्भया की घटना से पहले होता, पुलवामा से पहले होता तो आज कैंडिल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। कलाकारों ने नाटक के अंदर चल रहे दुर्योधन वध नौटंकी में राजनीतिज्ञों
पर प्रहार किया तो पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ा। बंगाल चुनाव पर कटाक्ष किया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ममता बनर्जी, मधु कोड़ा और लालू यादव भी लपेटे में आते रहे। पत्रकार को लपेटे में लेतेहुए कहा कि ‘प्रिंटिंग मिस्टेकपत्रकार के बचने की टेक्नोलॉजी है, सुविधा संपन्न होकर तो लोग सदन में भी नाटक करते हैं विपरीत परिस्थिति को भी अनुकूल बनाने वाला मंचीय कलाकार होता है।’

नाटक की समाप्ति के बाद आशीर्वाद रंगमंडल के सचिव अमित रौशन समेत अन्य अतिथियों ने पूरी टीम को सम्मानित किया। दुर्योधन अमर कुमार भांजा, भीम राज प्रतीक पाल, कृष्ण उज्ज्वल सिन्हा, मुखिया अविनाश तिवारी तथ ग्रामीण आसिफ खान, अदनान कासिफ एवं राहुल कुमार ने जबरदस्त छाप छोड़ी। मेकअप एवं मंच सज्जा संजीत प्रजापति, लाइट उज्वल सिन्हा एवं संगीत सिकंदर कुमार का था। वहीं, हारमोनियम मास्टर सिकंदर कुमार, किलनारेट मास्टर विजय शंकर राम एवं नाल मास्टर आनंद कुमार रवि ने वादन के साथ अभिनय भी किया।

जानिए निर्देशक को नाटक के लेखक एवं निर्देशक सैकत चट्टोपाध्याय 1988 से रंगमंच पर सक्रिय हैं तथा अब तक 199 राष्ट्रीय पुरस्कार इन्हें नाटक में अभिनय, लेखन और निर्देशन के लिए मिला है। इसके अलावा झारखंड का राजकीय कला सम्मान, झारखंड रत्न सम्मान, राजीव गांधी सम्मान, पश्चिम बंग गणतांत्रिक लेखक संघ सम्मान, अंग नाट्य सम्मान, ताज रंगश्री सम्मान, चैतन्य महाप्रभु सम्मान, रंगमंच सम्मान, सत्यनारायण गोयल सम्मान, ब्रज नाट्य विभूषण सम्मान सहित देश के कई हिस्से से 56 सम्मान प्राप्त हुए हैं। सैकत बांग्ला और हिंदी के 67 नाटकों का 876 प्रस्तुति कर चुके है, बेगूसराय में आप कौन चीज के डायरेक्टर हैं जी की यह 101 वीं प्रस्तुति थी। (हि.स.)।

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