फागुनी शाम

– नामवर सिंह

01 मई 1927 को वाराणसी के जायतपुर में जन्म। आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, छायावाद, इतिहास और आलोचना, आलोचक के मुख से। 19 फ़रवरी 2019 को निधन।

काव्यांश

फागुनी शाम

फागुनी शाम अंगूरी उजास
बतास में जंगली गंध का डूबना

ऐंठती पीर में
दूर, बराह-से
जंगलों के सुनसान का कुंथना।

बेघर बेपरवाह
दो राहियों का
नत शीश
न देखना, न पूछना।

शाल की पँक्तियों वाली
निचाट-सी राह में
घूमना घूमनाघूमना।

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