मध्य पूर्व से कम होगा पेट्रोलियम का आयात

नई दिल्ली। क्रूड ऑयल का उत्पादन नहीं बढ़ाने के ओपेक देशों का फैसला आने के बाद भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल (क्रूड) की खरीद को बढ़ाने की नीति अपनायी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बात का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन क्रूड के आयात के लिए निकाले गए स्पॉट टेंडर में अमेरिका से खरीद की मात्रा बढ़ा दी गई है। सऊदी अरब से क्रूड का आयात कम कर दिया गया है।

इंडियन ऑयल ने अप्रैल-मई में कच्चे तेल की खरीदारी के लिए स्पॉट टेंडर निकाला है। इसके मुताबिक पश्चिमी अफ्रीका, मध्य पूर्व, अमेरिका और कनाडा से क्रूड की खरीद की जानी है। इस स्पॉट टेंडर में खरीद के जो आंकड़े शामिल किए गए हैं, उसके मुताबिक सऊदी अरब से कच्चे तेल की खरीदारी 36 फीसदी कम की गई है, जबकि अमेरिका से क्रूड का आयात दोगुना से ज्यादा बढ़ा दिया गया है।

माना जा रहा है कि ओपेक देशों के उत्पादन में कटौती जारी रखने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी क्रूड ऑयल का आकर्षण बढ़ा है। भारत जैसा देश, जो अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, उसके लिए क्रूड ऑयल की कीमत में पड़ने वाला मामूली फर्क भी काफी असर डालता है। कोरोना काल की मंदी के दौरान ओपेक देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने की नीति बना रखी है। जिसके कारण कच्चे तेल की कीमत में यदा कदा होने वाली मामूली फिसलन के बावजूद तेजी बनी हुई है।

हालांकि तेल कंपनियों की ओर से अमेरिका से क्रूड ऑयल की खरीद को तरजीह देने की एक प्रमुख वजह तेल में सल्फर की मात्रा बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि अमेरिकी कच्चे तेल में सल्फर की मात्रा कम होती है, जबकि मध्य पूर्व के देशों में उत्पादित होने वाले कच्चे तेल में सल्फर की मात्रा ज्यादा होती है। ऐसे में कच्चे तेल की रिफाइनिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (आईओसी) समेत देश की दूसरी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां मई के महीने में सऊदी अरब से कच्चे तेल की खरीद को घटाने की योजना बना रही हैं। उनकी योजना अमेरिका और स्पॉट बाजार से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीदने की है, ताकि मध्य पूर्व देशों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा सके।

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