खाद्य मंत्रालय विनिवेश से 29000 हजार करोड़ जुटाएगा

नई दिल्ली। खाद्य मंत्रालय के तहत काम करने वाली केंद्रीय भंडारण निगम और फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसी कंपनियां तीन साल की अवधि में विनिवेश, रेंट और जमीन की बिक्री से 29 हजार करोड़ रुपये जुटाएगी। राजस्व प्राप्त करने का यह लक्ष्य केंद्र सरकार के रेवेन्यू टार्गेट के तहत तय किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस साल पेश किए गए बजट प्रस्तावों में केंद्र सरकार ने अपने राजस्व लक्ष्य (रेवेन्यू टार्गेट) को पूरा करने के लिए सभी मंत्रालयों को उनके तहत काम करने वाली कंपनियों में विनिवेश की संभावनाओं का पता लगाने के लिए कहा है। केंद्र के इस निर्देश के मुताबिक खाद्य मंत्रालय ने अपने उद्यमों केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को अगले 3 सालों में विनिवेश के साथ ही अन्य उपायों से न्यूनतम 29000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य दिया है।

खाद्य मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के पास ऐसी जमीन काफी बड़ी मात्रा में है, जिसका अभी तक कोई उपयोग नहीं हो सका है। ये जमीन अभी तो बिना उपयोग के पड़ी ही हुई है, निकट भविष्य में भी इनका उपयोग होने की संभावना भी नहीं है। इसमें से अधिकांश जमीन शहरी क्षेत्र या आबादी वाले इलाकों में है, जहां इनके एवज में केंद्रीय भंडारण निगम कोअच्छी धनराशि मिल सकती है। सरकार का इरादा अगले 3 सालों में खाली पड़ी बिना उपयोग वाली जमीन को पूरी तरह से बेच देने का है। ऐसा करने से विनिवेश के लक्ष्य के बड़े हिस्से को प्राप्त किया जा सकेगा।

अभी पूरे देश में केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के 423 केंद्रों के पास करीब 3500 एकड़ जमीन पड़ी हुई है। सरकार का इरादा इस जमीन के एक हिस्से का इस्तेमाल केंद्रीय भंडारण निगम की भंडारण क्षमता को और बढ़ाने के लिए करने का है, लेकिन जानकारों का कहना हैकि निगम की मौजूदा क्षमता और उसमें होने वाले आवक को देखते हुए भंडारण क्षमता को अधिकतम 20 फीसदी तक ही बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में अतिरिक्त जमीन का इस्तेमाल करने के बाद भी निगम के पास काफी जमीन बची रहेगी, जिसे खुले बाजार में बेच कर सीडब्ल्यूसी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक पैसे का प्रबंध किया जा सकता है।

जानकारों के अनुसार खाद्य मंत्रालय ने भंडारण निगम के अधिकारियों को मौजूदा खाद्य गोदाम की क्षमता बढ़ाने का निर्देश भी दिया है। मंत्रालय द्वारा कराई गई एक स्टडी में कहा गया है कि अगर मौजूदा खाद्य गोदाम की ऊंचाई 24 बोरी की ऊंचाई तक बढ़ा दी जाए, तो निगम को हर साल 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो केंद्रीय भंडारण निगम का मुनाफा काफी तेजी से बढ़ेगा और अपने विस्तार कार्यक्रमों के लिए वह आत्मनिर्भर हो जाएगा।

केंद्रीय भंडारण निगम अपनी आय बढ़ाने के लिए अपने खाली पड़े गोदामों के इस्तेमाल के लिए निजी कंपनियों को भी आमंत्रित करने पर विचार कर रहा है। ये निजी कंपनियां निगम की खाली जगहों पर ग्रीनफील्ड वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर उसका इस्तेमाल करेंगी। इसके एवज में निजी कंपनियां सीडब्ल्यूसी को किराये या लीज राशि का एग्रीमेंट के तहत भुगतान भी करेंगी। जानकारों का कहना है कि ई-कॉमर्स सेक्टर में जैसे जैसे काम बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे वेयरहाउसिंग की भी मांग बढ़ी है। ऐसे में सरकार केंद्रीय भंडारण निगम और एफसीआई जैसी कंपनियों के खाली पड़े जगहों का इस्तेमाल निजी क्षेत्र की कंपनियों को भंडारण करने के लिए दे सकती है। इससे न केवल सरकारी कंपनियों की आय में बढ़ोतरी होगी, बल्कि उनके पास पड़ी अतिरिक्त जमीन का भी अधिकतम इस्तेमाल हो सकेगा।

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