सूर्य पुत्र शनिदेव को देवताओं का दण्डाधिकारी माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने शनि देव (Shani Dev) की तपस्या से प्रमन्न होकर शवि देव को यह पद प्रदान किया था । इसी कारण ही शनि देव प्रत्येक व्यक्ति को उसके किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के […]

ज्योतिष में 12 राशियों का जिक्र मिलता है। हर किसी की मेष से लेकर मीन तक में कोई एक राशि होती है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, कुछ राशियां ऐसी होती हैं जो किस्मत की धनी होती हैं। ये जिस भी काम में हाथ डालते हैं, इन्हें सफलता (Success) हासिल […]

आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) ने अपने ग्रंथ नीति शास्त्र में जीवन के तमाम पहलुओं से जुड़ी बातें लिखी हैं। चाणक्य के अनुसार, पति-पत्नी का रिश्ता बेहद पवित्र होता है। इस रिश्ते को भरोसे और प्रेम (love) से मजबूत बनाया जाता है। पति-पत्नी के रिश्ते में झूठ और धोखा आने पर रिश्ता […]

– कौशल मूंदड़ा पिछले दिनों से देशभर में जनसंख्या नीति को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि माता-पिता नाजायज हो सकते हैं लेकिन संतान नहीं क्योंकि अपने जन्म में बच्चे की कोई भूमिका नहीं होती। इन्हीं दो मुद्दों […]

– सुरेश हिन्दुस्थानी समान नागरिक संहिता को लेकर कुछ संस्थाओं द्वारा यह प्रचारित करने का प्रयास किया जा रहा है कि यह भारत के मुस्लिमों के विरोध में है। जबकि इसपर गंभीरतापूर्वक मंथन किया जाए तो समान नागरिकता कानून मुस्लिमों के लिए बड़ा हितकारक सिद्ध होगा। हम जानते हैं कि […]

– अनिल निगम केरल के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान द्वारा दहेज कुप्रथा के खिलाफ एक दिवसीय उपवास करने से भारतीय समाज की इस बुराई पर एकबार फिर बहस शुरू हो गई है। भारत को आजाद हुए 74 वर्ष हो गए हैं लेकिन दहेज प्रथा भारतीय समाज में एक बदनुमा दाग […]

– रंजना मिश्रा डब्ल्यू एच ओ के मुताबिक भारत में 20 करोड़ से ज्यादा लोग डिप्रेशन सहित अन्य मानसिक बीमारियों के शिकार हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में काम करने वाले लगभग 42 प्रतिशत कर्मचारी डिप्रेशन और एंग्जाइटी से पीड़ित हैं। डिप्रेशन और अकेलापन भारत सहित पूरी दुनिया के […]

– गिरीश्वर मिश्र शिक्षा का मूल्य इस अर्थ में जगजाहिर है कि व्यापार, स्वास्थ्य, सामरिक तैयारी, यातायात, संचार, कृषि, नागरिक सुरक्षा यानी जीवन कोई भी क्षेत्र लें उसमें हमारी प्रगति सिर्फ और सिर्फ इसी बात पर टिकी हुई है कि हम ज्ञान की दृष्टि से कहाँ पर स्थित हैं। हम […]

– हृदयनारायण दीक्षित विश्व कर्मप्रधान है। तुलसीदास ने भी लिखा है- कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। सत्कर्म की प्रशंसा और अपकर्म की निन्दा समाज का स्वभाव है। लोकमंगल से जुड़े कर्मों की प्रशंसा से समाज का हित संवर्द्धन होता है। प्रशंसा का प्रभाव प्रशंसित व्यक्ति पर भी पड़ता है। वह […]

– उपेन्द्र नाथ राय कभी ‘तिलक, तराजू और तलवार। इनको मारो जूते चार।’ का नारा देने वाली बसपा प्रमुख मायावती को 2007 के बाद फिर ब्राह्मणों की याद आ गयी। 14 अप्रैल 1984 को बसपा के गठन के बाद पहली बार ब्राह्मण मतदाताओं के समर्थन से 2007 में पूर्ण बहुमत […]